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FD या जीवन बीमा क्या लें

FD या जीवन बीमा क्या लें या किसमें निवेश करें मुझसे सभी पाठक यह सवाल करते रहते हैं तो आज विस्तार से आसान हिंदी में समझते हैं कि FD या जीवन बीमा में से क्या लें। किसको जीवन बीमा लेना चाहिये और किसे फिक्स्ड डिपॉजिट करवाना चाहिये और दोनों में से किस में अधिक फायदा होता है। आमतौर पर सावधि जमा और लाइफ इन्शुरन्स दोनो ही बचत करने के साधन हैं मगर आपको किसमें निवेश करना चाहिये और किस निवेश में क्या फायदा मिलेगा यह सब समझेंगे। Fixed Deposit or Life Insurance in Hindi.



FD या जीवन बीमा क्या लें

FD या जीवन बीमा

एफडी बैंक, पोस्ट ऑफीस, NBFC या अन्य कंपनियों में करवाये जा सकते हैं। बीमा केवल बीमा कंपनियों से ही लिया जा सकता है। एफडी और लाइफ इन्शुरन्स में सबसे बड़ा अंतर यह है कि एफडी निवेश का साधन है मगर बीमा रिस्क कवर है। जीवन बीमा परिवार को बीमाधारक के ना रहने पर उसकी आय से हुई हानी की रक्षा करता है।

अंतर

फिक्स्ड डिपॉजिट निवेश का साधन है जिसमें आप एक निश्चित राशि एक निश्चित समय के लिये निवेश करते हैं और बैंक उस पर आपको पूर्व निर्रधारित दर पर ब्याज देता है। आमतौर पर बैंक आपको मैच्योरिटी से पहले पैसे निकालने की अनुमति नहीं देते हैं मगर आप कुछ शुल्क दे कर समय से पहले अपनी एफडी से पैसे निकलवा सकते हैं।


दूसरी ओर जीवन बीमा किसी जीवन बीमा प्रदाता कंपनी जैसे कि LIC से ले सकते हैं। जीवन बीमा के लिये निर्धारित प्रीमियम नियमित रूप से वार्षिक, अर्ध वार्षिक अथवा तिमाही अवधि में जमा करवा सकते हैं। एंडोमेंट जीवन बीमा पॉलिसी बीमित व्यक्ति को मैच्योरिटी वैल्यू प्रदान करती है। बीमित व्यक्ति की पॉलिसी अवधि में मृत्यु होने पर नामित व्यक्ति को सम एश्योर्ड और बोनस यदि कोई हो तो मिलता है। टर्म इंश्योरंस में कोई मैच्योरिटी वैल्यू नहीं मिलती है। क्यों कि टर्म इंश्योरंस में कोई मैच्योरिटी वैल्यू यानि परिपक्वता राशि नहीं मिलती है तो यहां हम फिक्स्ड डिपॉजिट की तुलना एंडोमेंट प्लान से ही करेंगे।

अवधि

एफडी छोटे समय जैसे कि एक वर्ष से पांच वर्ष के लिये आदर्श निवेश है जबकि जीवन बीमा लंबी अवधि के लिये होता है। जीवन बीमा दस से पचीस वर्षों तक के लिये लिया जाता है।

लचीलापन

एफडी को आप परिपक्वता से पहले कुछ शुल्क दे कर खुलवा सकते हैं मगर जीवम बीमा आवधि की समाप्ति से पहले नहीं बंद कर सकते।

भुगतान

फिक्स्ड डिपॉजिट के लिये राशि एक बार ही जमा करवायी जाती है मगर जीवन बीमा (यदि वह एकल प्रीमियम नहीं है तो) के लिये बीमा की पूरी अवधि तक नियमित रूप से पूर्व निर्धारित प्रीमियम जमा करवाना होता है। प्रीमियम का निर्धारण अपकी आयु और अन्य प्रीमियम निर्धारित करने वाले कारकों पर निर्भर करता है।

रिटर्न की गारंटी

एफडी में ब्याज की दर और मैच्योरिटी वैल्यू यानि एफडी की अवधि की समाप्ति पर मिलने वाली राशि पहले से निर्धारित होती है। जीवन बीमा में बोनस वार्षिक आधार पर बीमा कंपनी घोषित करती है इसलिये बीमा अवधि के समापन पर क्या मैच्योरिटी वैल्यू मिलेगी यह पहले से निर्धारित नहीं होता।

कर बचत

जीवन बीमा के लिये दिये गये प्रीमियम पर इंकम टैक्स की धारा 80 सी के अंतर्गत कर से छूट मिलती है। जीवन बीमा पर मिली मैच्योरिटी वैल्यू भी पूरी तरह से कर मुक्त होती है। फिक्स्ड डिपॉजिट में धारा 80 सी के अंतर्गत कर से छूट प्राप्त करने के लिये कम से कम पांच वर्ष के लिये एफडी करवानी होगी। ऐसी एफडी को मैच्योरिटी से पहले नहीं निकलवाया जा सकता। एफडी पर 2019 से वर्ष में 40000₹ तक के ब्याज पर टीडीएस नहीं कटता है।

आयु

कम आयु में जीवन बीमा लेने पर कम प्रीमियम देना पड़ता है। अधिक आयु में इसे लेने से बढ़ा हुआ प्रीमियम देना पड़ता है। आमतौर पर पचास की आयु के बाद जीवन बीमा लेना कठिन हो जाता है। एफडी के लिये कोई आयु सीमा नहीं होती है। वास्तव में एफडी रिटायर्ड लोगों में आधिक लोकप्रिय है।

आसानी

एफडी करवाना आसान है। इसके लिये एक फार्म भरना होता है। यदि आपका पहले से बैंक खाता है तो मोबाइल बैंकिंग से भी आप एफडी कर सकते हैं। जीवन बीमा लेने के लिये अपनी और अपने परिवार की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देनी होती है और दी गई सूचना के आधार पर बीमा कंपनी निर्धारित करती है कि प्रीमियम की दर कितनी होगी और आवेदक को बीमा दिया जाये या नहीं।


क्या लें

एफडी निवेश का साधन है और इसमें एक बार ही निवेश करना होता है और यह कभी भी निकासी के लिये उपलब्ध हो सकती है। जीवन बीमा एक तरह से लंबी अवधि का करार है जिसमें आपको नियमित प्रीमियम देना होता है। प्रीमियम ना देनें पर पॉलिसी के नियमों के अनुसार जीवन बीमा के लाभ बंद भी हो सकते हैं।