बैंक डिपॉजिट पर ब्याज कैसे गिनते हैं

बैंक डिपॉजिट पर ब्याज कैसे गिनते हैं चाहे वो सेविंग खाते हों या फिक्स्ड डिपॉजिट इन पर बैंक ब्याज कैसे गिनते हैं? अाईये समझते हैं कि सेविंग अकाउंट और फिक्स्ड डिपॉजिट  पर इंटरेस्ट कैसे गिना जाता है, इसका फार्मुला क्या होता है और साधारण ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज यानि कंपॉउंड इंटरेस्ट में क्या अंतर होता है। इस सब को आसान हिंदी में समझने की कोशिश करते हैं। How interest is calculated in Bank Deposits in Hindi.

बैंक डिपॉजिट पर ब्याज कैसे गिनते हैं

ब्याज के प्रकार

आप ने कभी सोचा होगा कि सेविंग अकाउंट में तो हर दिन बैलेंस एक सा नहीं रहता फिर उसमें ब्याज कैसे और किस राशि पर गिनते है? फिक्स्ड डिपॉजिट पर साधारण ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज में क्या अंतर है और इसे कैसे गिना जाता है। आईये यह सब एक एक कर समझते हैं।

सेविंग अकाउंट पर ब्याज की गिनती

सेविंग अकाउंट पर ब्याज की गिनती दैनिक आधार यानी डेली बेसिस पर की जाती है। यानि जितना पैसे आप बैंक में जितने दिन के लिये रखते हैं सब पर ब्याज मिलता है। सेविंग अकाउंट पर ब्याज गिनने का फार्मुला है

मासिक ब्याज = दैनिक बैलेंस राशि x (दिनों की संख्या) x (ब्याज दर/100) / (वर्ष में दिन)

अब यदि बैक में पूरे तीस दिन आपका बैलेंस 30000 रुपये था और ब्याज दर 4% तो ब्याज गिनेंगे

मासिक ब्याज = 30000 x (30) x (4/100) / (365) = 98.63 रुपये।

अब यदि महीने में 15 दिन आपके खाते में बैलेंस 30000 था और बाकी 15 दिन आपके खाते में बैलेंस 15000 था तो ब्याज की गिनती होगी

मासिक ब्याज = [(30000 x (15) x (4/100) / (365))+(15000 x (15) x (4/100) / (365))] = 73.96 रुपये।

सेविंग अकाउंट पर अधिकतर बैंक तिमाही ब्याज देते हैं।

फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज की गिनती

फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज की गिनती दो तरह से की जाती है, साधारण यानि सिंपल इंटरेस्ट और चक्रवृद्धि ब्याज यानि कंपअउंड इंटरेस्ट। साधारण ब्याज की गणना मूलधन राशि, प्रतिवर्ष ब्याज दर और उस समय के लिए होती है जिसके लिए वर्षों में धन दिया जाता है।

साधारण ब्याज

साधारण ब्याज = मूल धन x ब्याज दर / 100 x वर्ष


उदाहरण के लिए, यदि 10,000 रुपये की राशि सालाना 10% ब्याज दर पर 3 साल के लिए निवेश की जाती है, तो परिपक्वता के समय,

ब्याज = 10,000 x 10/100 x 3 = 3,000 रुपये

कुल राशि = 13,000 रुपये

चक्रवृद्धि ब्याज यानि कंपाउंड इंटरेस्ट

चक्रवृद्धि ब्याज यानि कंपाउंड इंटरेस्ट की गणना में पहले वर्ष में अर्जित ब्याज को मूल धन में जोड़ दिया जाता है और इसी प्रकार साल का अर्जित ब्याज मूलधन में जुड़ता चला जाता है। इसकी गणना ब्याज दर के साथ सालों की अवधि में उठाए गए ब्याज दर के साथ मूलधन को गुणा करके गणना की जाती है। जिसके लिए ब्याज की गणना की जाएगी

कंपाउंड ब्याज = मूलधन {(1 + ब्याज दर / 100)समय-1}

उदाहरण के लिए, यदि प्रति वर्ष 10,000 रुपये की राशि 3 वर्ष के लिए 10% वार्षिक आधार पर कंपाउंड ब्याज दर निवेश की जाती है तो परिपक्वता के समय

चक्रवृद्धि ब्याज = 10,000 {(1 + 10/100)3 – 1} = 3,310 रुपये

कुल राशि = 13,310 रुपये।

चक्रवृद्धि ब्याज वार्षिक या तिमाही आधार पर हो सकता है। उपरोक्त गणना वार्षिक आधार पर कंपाउंड ब्याज दर की है। यदि ब्याज दर तिमाही आधार पर कंपाउंड होगी तो ब्याज इससे भी अधिक होगा। 

यहां आपको समझ आ गया होगा कि बैंक डिपॉजिट पर ब्याज कैसे गिनते हैं। फिर भी अंतिम मैच्योरिटी वेल्यू गिनने के लिये अपने बैंक से संपर्क करें।


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