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RD vs FD in Hindi

Learn RD vs FD in Hindi रिकरिंग डिपॉजिट और फिक्स्ड डिपॉजिट में से क्या चुनें। जानिये आवर्ती जमा और सावधि जमा में क्या फर्क है और दोनों के क्या क्या फायदे हैं। यानी RD और FD किस तरह कार्य करतीं हें और दोनों में से मुझे इन में से निवेश के लिये कौन सा साधन चुनना चाहिये। हम बैंक में जा कर रिकरिंग डिपॉजिट और फिक्स्ड डिपॉजिट दोनों करवा सकते हैं मगर किस में मिलता है ज्यादा ब्याज और किस अवस्था में कौन सा डिपॉजिट करवाना चाहिये इसे समझते हैं आसान हिंदी में।



RD vs FD in Hindi रिकरिंग डिपॉजिट और फिक्स्ड डिपॉजिट में से क्या चुनें

बैंक खातों के प्रकार पर आप बैंक में खोले जा सकने वाले अलग अलग तरह के खातों के बारे में विस्तार से जान सकते हें। रिकरिंग डिपॉजिट और फिक्स्ड डिपॉजिट आप डाक घर लघु बचत योजनाओं के अंतर्गत डाक घर में भी खुलवा सकते हैं। RD vs Fixed Deposit in Hindi में जानिये दोनों में क्या फर्क है और क्या क्या फायदे हैं। साथ ही पढ़िये SIP vs RD in hindi हमारी साइट पर।

बिना जोखिम के निवेश

सावधि जमा और आवर्ती जमा भारत में दो सबसे लोकप्रिय निवेश योजनाएं हैं, खासकर ऐसे निवेशकों के लिए जो बिल्कुल भी जोखिम नहीं लेना चाहते। रिकरिंग डिपॉजिट और फिक्स्ड डिपॉजिट योजना में अपने पैसे का निवेश करने का मुख्य लाभ यह है कि इनमें कोई जोखिम नहीं होता पर निश्चित रिटर्न मिलते हैं। लेकिन कई बार निवेशकों को भ्रम हो जाता है कि उन्हें आरडी या एफडी में से किस योजना में निवेश करना चाहिये। अधिक जानकारी के लिये पढ़ते रहिये RD vs Fixed Deposit in Hindi.


निश्चित रिटर्न

आरडी और एफडी दोनों में पहले से निश्चित आय मिलती हैं जो सभी प्रमुख बैंकों और डाक घरों में खुलवाये जा सकते हैं। दोनों योजनाओं में आप एक निश्चित राशि निवेश कर सकते हैं जिस पर आपको एक निश्चित दर पर ब्याज प्राप्त होगा। योजना के अंत में निवेशकों को आपनी निवेशित पूंजी और अर्जित ब्याज दोनों प्राप्त होंगे।

एफडी और आरडी के बीच प्रमुख अंतर

जब हम आरडी और एफडी के बारे में बात करते हैं तो इनमें सबसे महत्वपूर्ण अंतर है जिससे हम सब को अवगत होना चाहिए। जबकि आरडी और एफडी दोनों एक निश्चित कार्यकाल के लिये करवायी जातीं हैं, एफडी में निवेशक एक बार राशि जमा कर सकता हैं जबकि आरडी के निवेशकों को नियमित अंतराल पर निश्चित राशि जमा करनी होती है।

सावधि जमा या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)

जो ग्राहक सावधि जमा का विकल्प चुनते हैं उन्हें एक कार्यकाल चुनना होगा, जो आम तौर पर 7 दिनों से 10 वर्ष तक होता है, और एक बार राशि जमा करनी होगी। राशि पर ब्याज निवेशक के खाते में मासिक या त्रैमासिक आधार पर जमा किया जाता है। यहां पढ़ें बैंक डिपॉजिट पर ब्याज कैसे गिनते हैं

आवर्ती जमा या रिकरिंग डिपॉजिट (RD)

जब आवर्ती जमा की बात आती है तो निवेशक हर महीने एक निश्चित राशि जमा करवानी होती हैं और जिस पर ब्याज मिलता हैं। परिपक्वता पर निवेशक को पूंजी के साथ ब्याज का भुगतान किया जाता है।

समय अवधि

आमतौर पर एफडी योजनाओं के लिए समय अवधी 7 दिनों से 10 वर्ष के बीच हो सकती है। निवेशक इनमें से एक अवधी चुन सकता है जिसके साथ वह सबसे ज्यादा आरामदायक है। आवर्ती जमा के लिए अवधी आमतौर पर 1 वर्ष से 10 वर्ष तक हो सकता है। आवर्ती जमा में ग्राहक को पूरी अवधी तक नियमित अंतराल पर एक निश्चित राशि जमा करनी होती है जो कि अधिकतर मासिक ही होती है।

ब्याज दर

फिक्स्ड डिपॉजिट के लिये एक वर्ष की अवधि के लिए ब्याज दर 6.00% से 8.00% के बीच हो सकती है। ब्याज दर निवेश राशी और कार्यकाल पर निर्भर करती है। एफडी के लिए ब्याज दर आरडी की तुलना में थोड़ा अधिक होती है। आरडी कें ब्याज दर एक वर्ष के कार्यकाल के लिए 5.25% से 7.00% के बीच हो सकती है। आरडी की ब्याज दर आमतौर पर कार्यकाल और मासिक निवेश राशि पर निर्भर करती है।


आपको क्या चुनना चाहिए – आरडी या एफडी

उन लोगों के लिए जिनके पास एफडी में निवेश करने के लिए एकमुश्त राशि नहीं है, लेकिन हर महीने आय से निवेश राशि का एक छोटा सा हिस्सा अलग कर सकते है उनके लिये आवर्ती जमा (आरडी) सही है। RD vs Fixed Deposit in Hindi में हमने समझा कि आरडी और एफडी दोनों जोखिम ना चाहने वाले निवेशकों के लिए सबसे उपयुक्त हैं। SIP Investment का उपयोग कर आप यह जान सकते हैं कि कितनी राशि नियमित जमा कर एक निशचित ब्याज दर पर आपको कितनी मैच्योरिटी वेल्यू मिल सकती है। आरडी को कई लोगों द्वारा प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि इसमें बहुत कम राशी प्रति माह जमा करवा सकते हैं और लगभग एफडी जितना रिटर्न भी मिल जाता है।