शेयर बाजार का महत्व Importance of Share Markets

शेयर बाजार का महत्व, कार्य और उद्देश्य तथा अर्थव्यवस्था में इसका योगदान। दुनिया के सभी देशों में शेयर बाजार होते हैं मगर इन्हैं किस लिये बनाया जाता है, इनका योगदान क्या है और ये क्यों इतने महत्वपूर्ण हैं किसी भी अर्थव्यवस्था के लिये। क्यों प्रतिदिन समाचारों में इनके उतार चड़ाव को इतना महत्व दिया जाता है? आखिर शेयर बाजार में होता क्या है यह सब समझेंगे आसान हिंदी में। शेयर बाजार के अन्य सभी पहलुओं को समझने के लिये पढ़ें Share Market in Hindi हमारी साइट पर। Importance of Share Markets and it’s working.

शेयर बाजार का महत्व
शेयर बाजार का महत्व

कार्य और उद्देश्य

शेयर बाजार कंपनियों के लिये पैसा जुटाने के लिये मंच प्रदान करता है। यह कंपनियों के शेयरों की सार्वजनिक रूप से व्यापार करने की अनुमति देता है, और सार्वजनिक बाजार में कंपनियों को उनके स्वामित्व के अंश बेचकर विस्तार के लिए अतिरिक्त वित्तीय पूंजी जुटाने में मदद करता है। स्टॉक एक्सचेंज निवेशकों को प्रतिभूतियों के व्यापार के लिये लिक्विडिटी यानी तरलता प्रदान करता है जिससे उन्हें तेज़ी से और आसानी से बेचा जा सके।

कंपनियों और निवेशकों के लिये

कंपनियां शेयर इस लिये जारी करतीं हैं कि व्यवसाय के लिये पूंजी जुटाई जा सके। निवेशक कोई शेयर इस लिये खरीदते हैं जिससे वे कंपनी के विकास और मुनाफे में भागीदार बन सकें और उस शेयर की मांग बढ़ने पर उसे ऊंची कीमतों पर बेच सकें। शेयर बाजार कंपनियों और निवेशकों को इस सब के लिये मंच प्रदान करता है। शेयर बाजार का महत्व कंपनियों और निवेशकों के लिये एक सा ही है।

तरलता प्रदान करता है

शेयर बाजार मे किसी कंपनी के शेयर सुचिबद्ध होने के बाद लगभग हमेशा उसमें खरीददार और बेचने वाले उपलब्ध रहते हैं। शेयर बाजार वह मंच है जिस पर हमेशा शेयरों की उपलब्धता और तरलता बनी रहती है। इसी तरलता के कारण शेयर बाजार में निवेशकों के लिये निवेश करना और उससे लाभ उठाना आसान हो जाता है। प्रॉपर्टी और अन्य संपत्तियों को बेचने में ऐसी तरलता नहीं मिलती है।

अर्थव्यवस्था के मापक

स्टॉक और अन्य संपत्तियों की कीमत आर्थिक गतिविधि की गतिशीलता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और सामाजिक मनोदशा का संकेतक हो सकता है। एक अर्थव्यवस्था जहां शेयर बाजार में वृद्धि हो रही हो उसे उभरती हुई अर्थव्यवस्था माना जा सकता है। शेयर बाजार को अक्सर किसी भी देश की आर्थिक ताकत और विकास का प्राथमिक संकेतक माना जाता है। लंबी अवधी तक बढ़ते शेयर बाजार देश में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों का संकेत देते हैं और गिरते बाजारों का मतलब यह हो सकता है कि आर्थिक गतिविधियां सिकुड़ रहीं हें।


नियंत्रण

शेयरों की कीमतें घरेलू निवेश और खपत को भी प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए केंद्रीय बैंक जैसे कि आरबीआई शेयर बाजार के नियंत्रण, व्यवहार और वित्तीय प्रणाली के कार्यों के सुचारू संचालन पर नजर रखते हैं। वास्तव में देश में वित्तीय स्थिरता पर नजर रखना ही आरबीआई का मुख्य काम है।

आसान लेनदेन

एक्सचेंज प्रत्येक लेनदेन के लिए क्लीयरिंग हाउस के रूप में भी कार्य करते हैं जिसका अर्थ है कि वे शेयर बेचने वाले से एकत्र करते हैं और खरीदने वाले को वितरित करते हैं और शेयरों के विक्रेता को भुगतान की गारंटी देते हैं। यदि काउंटरपार्टी लेनदेन पर डिफ़ॉल्ट हो जाये तो उस स्थिति में स्टॉक एक्सचेंज व्यक्तिगत खरीदार या विक्रेता के जोखिम को समाप्त करते है।

निवेशकों की बढ़ती रुचि

बैंक और शेयर बाजार मिल कर किसी भी देश में वित्तीय प्रणाली को समृद्ध बनाने में अपना अपना योगदान देते हैं। आंकड़ों के अनुसार हाल के दशकों में अधिकतर देशों में घरेलू निवेश में शेयरों का हिस्सा बाड़ी तेजी से बढ़ा है। हमारे देश में भी बढ़ते शेयर बाजार इसी तरह के संकेत दे रहे हैं। हाल के वर्षों में हमारे देश में युवाओं का रुझान SIP और म्यूचुअल फंड की तऱफ बढ़ा है। यह भी अप्रत्यक्ष रूप से शेयरों में निवेश का ही तरीका है।

शेयर बाजार का महत्व किसी भी देश की वित्तीय प्रणाली को सुचारू रूप से चलाने के लिये बहुत ही आवश्यक हो गया है जिसके बिना आर्थिक गतिविधियों को स्पीड नाहीं मिल पाती है। आप भी शेयर बाजार सीखें और तरक्की की रफ्तार में शामिल हो जायें।


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