Negotiation Meaning in Hindi

Negotiation Meaning in Hindi निगोशिएशन क्या है और एक अच्छे Negotiator कैसे बनें। कैसे इसके द्वारा किसी समस्या या सौदेबाजी को निपटाया जा सकता है। Negotiation को लेनदेन या समझौता वार्ता भी कह सकते हैं। कुछ लोग Negotiation की कला में निपुण होते हैं तो कुछ लोग इसमें फिसड्डी। इससे किसी भी बिजनेस डील को अपने लिए बेहतर बनाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है। आइए समझते हैं Negotiation क्या है और इसे सफलता पूर्वक कैसे निष्कर्ष तक पहुंचा सकते हैं।

Negotiation Meaning in Hindi
Negotiation Meaning in Hindi

निगोशिएशन क्या है

Negotiation ऐसी रणनीतिक चर्चा को कहते हैं जो एक मुद्दे को इस तरह से हल करती है जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य होती है। बातचीत में प्रत्येक पक्ष दूसरे को अपनी बात से सहमत करने के लिए मनाने की कोशिश करता है। ऐसी बातचीत जिसमें दो या अधिक पक्ष एक सरवमान्य नतीजे पर पहुंचने की कोशिश करते हैं उसे Negotiation कहते हैं। बातचीत करके सभी शामिल पक्ष बहस करने से बचने की कोशिश करते हैं और किसी तरह के समझौते तक पहुंचने के लिए सहमत होने की कोशिश करते हैं।



Negotiation को समझना

वार्ता में कुछ देना और लेना शामिल होता है, जिसका अर्थ है कि एक पक्ष बातचीत में आखिरकार अपनी बात मनवाने में कामयाब हो जाता है। दूसरा पक्ष उसे स्विकार करके Negotiation को पूरा करता है। फिर उसे चाहे नाममात्र की ही छूट क्यों ना देनी पड़े।



हालांकि Negotiation कई तरीके की हो सकतीं हैं फिर चाहे ये खरीददार और विक्रेता के बीच हों, एंपलायर और कर्माचारी के बीच या फिर दो सरकारों के बीच।

Negotiation कैसे काम करतीं हैं

वार्ता या Negotiation में दो या दो से अधिक पार्टियां शामिल होती हैं जो एक साथ किसी भी समझौते या संकल्प के माध्यम से किसी अंतिम लक्ष्य तक पहुंचने के लिए इस बातचीत में शामिल होती हैं। एक पक्ष अपनी स्थिति को रखता है, जबकि दूसरा या तो प्रस्तुत शर्तों को स्वीकार करेगा या अपनी स्थिति से मुकाबला करेगा। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है जब तक कि सभी पक्ष एक प्रस्ताव पर सहमत नहीं हो जाते हैं।

सभी पार्टियां Negotiations शुरू करने से पहले आमतौर पर दूसरे पक्ष की स्थिती को जानने और समझने का प्रयत्न करतीं हैं। साथ ही दूसरे पक्ष की ताकत और कमजोरियों का भी आकलन करतीं हैं। पहले से दूसरे को संभावित तर्कों को कैसे उत्तर देना है इसकी भी तैयारी की जाती है।

कुछ वार्ताओं में कुशल वार्ताकार या प्रोफेशनल जैसे कि वकील, रियल एस्टेट एजेंट या ब्रोकर की आवश्यकता भी पड़ सकती है।

Negotiation की कब आवश्यक्ता होती है

किसी भी सौदे में बहुत से लोग मान लेते हैं कि कीमतें और ऑफर बदले नहीं जा सकते हैं। लेकिन यह सच नहीं है। वास्तव में कई ऑफर लचीले होते हैं। विभिन्न क्षेत्रों में अपने मनपसंद समझौतों पर पहुँचने के लिए बातचीत करना फायदेमंद हो सकता है। जैसे कि लोन पर ब्याज दर को कम करने के लिए, घर की कीमत को कम करने के लिए, एक अनुबंध की शर्तों में सुधार करने के लिए या कार या किसी अन्य सामान को ख़रीदते समय बेहतर सौदा पाने के लिए।



मोलभाव मतलब भैया, ठीक ठीक लगा लो

भारत में हम जब भी कुछ ख़रीदते हैं तो दुकानदार को ज़रूर कहते हैं – भैया ठीक ठीक लगा लो। फिर चाहे वो कोई जरूरी सामान हो, कपड़े हों या सब्जी ही क्यों ना हो। हम ठीक ठीक लगा लो कहना नहीं भूलते। इसे भी Negotiation की श्रेणी में माना जाएगा। कई बार तो ग्राहक इसी मोल भाव में पूरा बाजार घूम आते हैं। चतुर दुकानदार ग्राहक की इस प्रवृति को समझ कर कुछ छूट दे कर सौदा हाथ से नहीं जाने देते।

जब आप कोई महंगी कार या घर खरीदते हैं तो Negotiation करके कीमतों में भारी फायदा पा सकते हैं। महंगी कार खरीदते समय कार की MRP से कहीं कम कीमत तक Negotiation किया जा सकता है। डीलर अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए आपको अच्छा खासा डिस्काउंट देने पर राजी हो सकता है। मकान खरीदते समय भी मोल भाव करके अच्छी कीमत पा सकते हैं। वास्तव में एक अच्छी Negotiation वही है जिसमें दोनों पक्ष अपने को फायदे में पाते हैं।

नौकरी स्वीकार करते समय Negotiate करना भी एक महत्वपूर्ण कौशल है। एंप्लायर के पहले प्रस्ताव में अक्सर कंपनी की कुछ गूंजाइश छिपी होता है। कर्मचारी अधिक ऊंची सैलेरी पाने के लिए बातचीत कर सकता है। नौकरी की पेशकश में सैलेरी पर Negotiate करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि सैलेरी में भविष्य की सभी बढ़ोतरियां प्रारंभिक सैलेरी के आधार पर ही होंगी।

Negotiation में ध्यान रखने योग्य बातें

किसी भी Negotiation को सफल बनाने ले किए कूछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। आइए देखते हैं वह कौन सी बातें हैं जिन पर ध्यान दे कर हम किसी सौदे को सफल बना सकते हैं।



Negotiation में शामिल लोग

सौदा जिनसे किया जाना है या जो लोग ख़ुद उस सौदे में निर्णय ले सकते हैं उन्हीं से बात की जानी चाहिए। बातचीत करने वाले या Negotiation करने वाले यदि किसी के प्रतिनिधी हैं औऱ स्वंय निर्णय नहीं ले सकते तो बातचीत या तो सफल नहीं होगी या बहुत समय लेगी। बातचीत यदि किसी बिचौलिए के जरिए हो रही है तो हो सकता है दी जाने वाली कीमत में उसका कमीशन भी शामिल हो। मकान आदि के सौदों में कई बार बिचौलिए बहुत आवश्यक भी होते हैं।

Negotiation को समझना

Negotiation के लिए वार्ता स्पष्ट भाषा में होनी चाहिए और दोनों पक्षों को उसकी समझ होनी चाहिए। भाषा स्पष्ट नहीं होगी तो विश्वास बनाने में कठिनाई होगी जिससे बातचीत में सफलता मिलना कठिन हो सकता है।

लचीलापन

कोई भी Negotiation तभी सफल हो सकती है जब दोनों में से कम से कम एक पार्टी अपने स्टैंड में लचीलेपन के लिए तैयार हो। यदि कोई भी अपनी स्थिती से रत्ती भर भी नहीं हटता तो Negotiation का सफल होना कठिन हो सकता है।

व्यावहारिकता

कोई भी मांग या बदलाव व्यावहारिक होने चाहिएं। किसी भी Negotiation में वही मांगे मानी जा सकतीं हैं जिन्हें वास्तव में पूरा किया जा सकता है।

अच्छे Negotiator कैसे बनें

हर कोई Negotiation में कुशल नहीं हो सकता मगर फिर भी कुछ बातों पर ध्यान रख कर एक अच्छी डील प्राप्त की जा सकती है। आइये देखते हैं किन बातों का ध्यान रख कर अच्छे Negotiator बना जा सकता है।

तैयारी के साथ जायें

जैसा की हमने उपर भी बताया। पूरी तैयारी के साथ जायें। रिसर्च करके पूरी सूचनाएं एकत्र करें। इससे दूसरी पार्टी को यह विश्वास भी होगा कि आप वास्तव में इस डील में रुचि रखते हैं।



व्यावहारिक बनें

व्यावहारिक बनें और दूसरी पार्टी की जगह स्वयं को रख कर देखें। अपनी बात को मज़बूती से रखने के साथ साथ दूसरे की स्थिती को भी समझें। अव्यावहारिक मांग बातचीत को असफल बना सकती है।

भावुक ना बनें

भावनाओं में आकर ऐसी डील स्विकार ना करें जिसमें बाद में पछताना पड़े। किसी वस्तु को देख इतने भावुक ना हों कि कोई भी कीमत देने को तैयार हो जाएं। कोई ख़ास मकान, पौशाक या वस्तु ऐसी हो सकतीं हैं जिनसे आपकी भावनाएँ जुड़ीं हों।

सीमाओं को समझें

यदि बातचीत में कोई भी पक्ष आगे नहीं बढ़ रहा और बात घूम फिर कर एक ही बिंदु पर आ रही है तो इसे खींचते रहने का कोई औचित्य नहीं है। मानसिक रूप से अपने आप को बातचीत से बाहर करने के लिए तैयार रखें और Negotiation की असफलता के लिए भी तैयार रहें।

संक्षेप में

हर Negotiation सफल हो यह कोई जरूरी नहीं है। आव्यावहारिक मांग, आपसी अविश्वास और बातचीत में असंयमित होना कभी कभी इसे असफल भी कर सकता है। आपसी बहस दोनों पक्षों को निराश कर सकती है और गुस्से का कारण भी बन सकती है। Negotiation के नतीजों को सहजता से स्विकार करने में ही बुद्धिमता है।

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Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। यह निवेश की सलाह नहीं है।