Share Premium in Hindi शेयर प्रीमियम क्या है और इसका कंपनी कैसे प्रयोग करती है। आज समझते हैं शेयर प्रीमियम के बारे में, यह क्या होता है, इसे कंपनी कैसे एकत्र करती है और इसे कैसे प्रयोग करती है। शेयर प्रीमियम को बैलेंस शीट में कैसे दिखाते हैं और इसका कंपनी और शेयरहोल्डरों को क्या लाभ हो सकता है।

Share Premium बैलेंस शीट में
शेयर प्रीमियम खाता आमतौर पर कंपनी की बैलेंस शीट में देनदारियों वाले पक्ष में शेयर कैपिटल और रिजर्व्स के साथ दिखाया जाता है। इस खाते में शेयरधारक द्वारा भुगतान किए गए पैसे को रखा जाता है जिसे कि शेयरधारक ने शेयर प्राप्त करने के लिये शेयर की फेस वैल्यू के अतिरिक्त भुगतान किया हो। इस खाते का उपयोग इक्विटी से संबंधित खर्चों के लिए किया जा सकता है, जैसे कि अंडरराइटिंग के खर्चे। बोनस शेयर जारी करने के लिए भी इसका उपयोग किया जा सकता है। कंपनी IPO में या राइट इश्यू में शेयर की फेस वैल्यू के अतिरिक्त प्रीमियम की मांग कर सकती है।
Share Premium in Hindi कैसे समझें
कंपनी के शेयरों के फेस वैल्यू और हाल ही में जारी किए गए शेयरों के लिए प्राप्त कुल राशि के बीच के अंतर को Share Premium कहते हैं। उदाहरण के लिए, कंपनी एबीसी ने अपने स्टॉक के 1000 शेयर जारी किए हैं। शेयरों का फेस वैल्यू या एट पार वैल्यू 10₹ प्रति शेयर है मगर कंपनी को प्रति शेयर 15₹ का भुगतान किया गया है। तो इस केस में 15000₹ एकत्र होंगे जिसमें से 10000₹ शेयर कैपिटल में जायेंगे और 5000₹ Share Premium खाते में जायेंगे।
Share Premium धन जुटाने का साधन
Share Premium कंपनी के पास ऐसा फंड है जो कि ना तो कैपिटल है और ना ही लोन मगर फिर भी यह धन कंपनी के पास लोन चुकाने या कंपनी के काम को फैलाने के काम आ सकता है। यहां आप समझ लें कि शेयर कैपिटल पर कंपनी डिविडेंड का भुगतान करती है और लोन पर ब्याज का। मगर इस पर इस तरह का कोई भूगतान नहीं करना होता है। हम यह कह सकते हैं कि यह किसी भी कंपनी के लिये धन जुटाने का ऐसा साधन है जिसका अतिरिक्त बोझ कंपनी पर सबसे कम पड़ता है। यहां यह भी समझ लें कि कोई भी शेयरहोल्डर किसी कंपनी को प्रीमियम देने पर तभी राजी होगा जब उसे विश्वास होगा कि कंपनी की आर्थिक हालत अच्छी है, कंपनी के शेयर की बाजार कीमत और बुक वैल्यू इसे जस्टीफाई करती है।
बाजार और कंपनी को मिले प्रीमियम में अंतर
यहां यह भी समझ लें कि जब आप ऊपर बतायी गयी कंपनी एबीसी का शेयर बाजार से 15₹ में लेते हैं तो भी आप वास्तव में 5₹ प्रीमियम का ही भूगतान करते हैं। मगर इस केस में यह अतिरिक्त राशी बेचने वाले शेयरहोल्डर को मिलती है। मगर जब कोई कंपनी IPO या राइट इश्यू के जरिये Share Premium लेती है तो ही यह कंपनी के पास जाता है और बैलेंस शीट की देनदारियों में जमा होता है।
बुक वैल्यू से तुलना
इस केस में एबीसी कंपनी यदि कोई शेयर 15₹ में दे रही है तो इसे इश्यू प्राइस कहा जायेगा। यदि इसकी तुलना कंपनी के पिछले शेयरों की बूक वैल्यू से करेंगे तो इसे समझने में थोड़ी और आसानी होगी। बुक वैल्यू और इश्यू प्राइस या ऑफर प्राइस सामान्यतः आसपास ही होते हैं। यदि इश्यू प्राइस पिछले बुक वैल्यू से बहुत अधिक है तो कह सकते हैं कि कंपनी अधिक प्रीमियम की मांग कर रही है यह मांग कंपनी के रिकार्ड, परफॉर्मेंस और भविष्य की योजनाओं से मेल खाती होनी चाहिये।
यहां हमने Share Premium in Hindi में आसान हिंदी में समझा कि शेयर प्रीमियम क्या है और इसका कंपनी कैसे प्रयोग करती है, इसे कंपनी कैसे एकत्र करती है और इसे कैसे प्रयोग करती है।
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