शेयर प्रीमियम क्या है और इसका कंपनी कैसे प्रयोग करती है। आज समझते हैं शेयर प्रीमियम के बारे में, यह क्या होता है, इसे कंपनी कैसे एकत्र करती है और इसे कैसे प्रयोग करती है। शेयर प्रीमियम को बैलेंस शीट में कैसे दिखाते हैं और इसका कंपनी और शेयरहोल्डरों को क्या लाभ हो सकता है।

- Share premium का अर्थ
- क्यों मिलता है कंपनी को Share Premium
- Share Premium को कैसे समझें
- Share Premium क्या होता है? (Table के माध्यम से समझें)
- Share Premium बैलेंस शीट में
- Share Premium कैसे समझें
- Share Premium Example
- Share Premium धन जुटाने का साधन
- बाजार और कंपनी को मिले प्रीमियम में अंतर
- Share Premium का उपयोग कहाँ किया जाता है?
- बुक वैल्यू से तुलना
- FAQs – Share Premium
Share premium का अर्थ
Share premium वह राशि होती है जो किसी कंपनी को उसके शेयर की face value से अधिक कीमत पर मिलती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी शेयर की face value ₹10 है और उसे ₹50 में issue किया जाता है, तो ₹40 share premium कहलाता है।
यह राशि कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण capital source होती है, जिसे company expansion, debt repayment या reserve fund के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। Share premium को company अपने “securities premium account” में रखती है।
क्यों मिलता है कंपनी को Share Premium
Companies अक्सर IPO या further public offer के दौरान share premium charge करती हैं। इसका मतलब यह है कि market कंपनी के future growth potential पर भरोसा कर रहा है।
Share Premium को कैसे समझें
हालांकि, share premium का ज्यादा होना हमेशा अच्छा संकेत नहीं होता। Investors को यह देखना चाहिए कि कंपनी का valuation justified है या नहीं। Overvalued shares future में correction भी दिखा सकते हैं। इसलिए share premium को समझना investment decision लेने में बहुत मदद करता है, खासकर IPO में निवेश करते समय।
Share Premium क्या होता है? (Table के माध्यम से समझें)
| Term | Meaning |
|---|---|
| Face Value | शेयर की मूल कीमत (जैसे ₹10) |
| Issue Price | जिस कीमत पर शेयर investors को बेचा जाता है |
| Share Premium | Issue Price – Face Value का अंतर |
| Securities Premium Account | जहां यह अतिरिक्त राशि जमा होती है |
| Use of Premium | Expansion, bonus shares, debt repayment |
Share Premium बैलेंस शीट में
शेयर प्रीमियम खाता आमतौर पर कंपनी की बैलेंस शीट में देनदारियों वाले पक्ष में शेयर कैपिटल और रिजर्व्स के साथ दिखाया जाता है। इस खाते में शेयरधारक द्वारा भुगतान किए गए पैसे को रखा जाता है जिसे कि शेयरधारक ने शेयर प्राप्त करने के लिये शेयर की फेस वैल्यू के अतिरिक्त भुगतान किया हो। इस खाते का उपयोग इक्विटी से संबंधित खर्चों के लिए किया जा सकता है, जैसे कि अंडरराइटिंग के खर्चे। बोनस शेयर जारी करने के लिए भी इसका उपयोग किया जा सकता है। कंपनी IPO में या राइट इश्यू में शेयर की फेस वैल्यू के अतिरिक्त प्रीमियम की मांग कर सकती है।
Share Premium कैसे समझें
कंपनी के शेयरों के फेस वैल्यू और हाल ही में जारी किए गए शेयरों के लिए प्राप्त कुल राशि के बीच के अंतर को Share Premium कहते हैं। उदाहरण के लिए, कंपनी एबीसी ने अपने स्टॉक के 1000 शेयर जारी किए हैं। शेयरों का फेस वैल्यू या एट पार वैल्यू 10₹ प्रति शेयर है मगर कंपनी को प्रति शेयर 15₹ का भुगतान किया गया है। तो इस केस में 15000₹ एकत्र होंगे जिसमें से 10000₹ शेयर कैपिटल में जायेंगे और 5000₹ Share Premium खाते में जायेंगे।
Share Premium Example
| Details | Amount |
|---|---|
| Face Value | ₹10 |
| Issue Price | ₹50 |
| Share Premium | ₹40 |
| Total Shares Issued | 1,000 |
| Total Premium Collected | ₹40,000 |
Share Premium धन जुटाने का साधन
Share Premium कंपनी के पास ऐसा फंड है जो कि ना तो कैपिटल है और ना ही लोन मगर फिर भी यह धन कंपनी के पास लोन चुकाने या कंपनी के काम को फैलाने के काम आ सकता है। यहां आप समझ लें कि शेयर कैपिटल पर कंपनी डिविडेंड का भुगतान करती है और लोन पर ब्याज का। मगर इस पर इस तरह का कोई भूगतान नहीं करना होता है। हम यह कह सकते हैं कि यह किसी भी कंपनी के लिये धन जुटाने का ऐसा साधन है जिसका अतिरिक्त बोझ कंपनी पर सबसे कम पड़ता है। यहां यह भी समझ लें कि कोई भी शेयरहोल्डर किसी कंपनी को प्रीमियम देने पर तभी राजी होगा जब उसे विश्वास होगा कि कंपनी की आर्थिक हालत अच्छी है, कंपनी के शेयर की बाजार कीमत और बुक वैल्यू इसे जस्टीफाई करती है।
बाजार और कंपनी को मिले प्रीमियम में अंतर
यहां यह भी समझ लें कि जब आप ऊपर बतायी गयी कंपनी एबीसी का शेयर बाजार से 15₹ में लेते हैं तो भी आप वास्तव में 5₹ प्रीमियम का ही भूगतान करते हैं। मगर इस केस में यह अतिरिक्त राशी बेचने वाले शेयरहोल्डर को मिलती है। मगर जब कोई कंपनी IPO या राइट इश्यू के जरिये Share Premium लेती है तो ही यह कंपनी के पास जाता है और बैलेंस शीट की देनदारियों में जमा होता है।
Share Premium का उपयोग कहाँ किया जाता है?
| Use | Description |
|---|---|
| Bonus Shares | Existing shareholders को extra shares देना |
| Writing off Expenses | Company setup खर्च को adjust करना |
| Debt Reduction | Company के कर्ज को कम करना |
| Expansion | Business growth और investment |
Share premium यह दिखाता है कि investors कंपनी के future growth पर कितना भरोसा कर रहे हैं।
बुक वैल्यू से तुलना
इस केस में एबीसी कंपनी यदि कोई शेयर 15₹ में दे रही है तो इसे इश्यू प्राइस कहा जायेगा। यदि इसकी तुलना कंपनी के पिछले शेयरों की बूक वैल्यू से करेंगे तो इसे समझने में थोड़ी और आसानी होगी। बुक वैल्यू और इश्यू प्राइस या ऑफर प्राइस सामान्यतः आसपास ही होते हैं। यदि इश्यू प्राइस पिछले बुक वैल्यू से बहुत अधिक है तो कह सकते हैं कि कंपनी अधिक प्रीमियम की मांग कर रही है यह मांग कंपनी के रिकार्ड, परफॉर्मेंस और भविष्य की योजनाओं से मेल खाती होनी चाहिये।
FAQs – Share Premium
Updated: April 2026