शेयर बाजार में सर्किट ब्रेकर क्या है और यह कैसे काम करता है। शेयरों और सूचकांकों पर लगने वाले सर्किट ब्रेकर के बारे में विस्तार से जानकारी, इसकी जरुरत क्यों पड़ती है और यह किस तरह से शेयर बाजार की सेहत के लिये जरुरी है। सर्किट ब्रेकर पूरे बाजार पर भी लग सकते हैं और अकेली स्क्रिप्ट पर भी। बाजारों में तेजी से आ जाने वाले उतार चढ़ाव को रोकने में सर्किट ब्रेकर किस तरह से काम करते हैं समझते हैं आसान हिंदी में। Circuit Breaker in Hindi.

Circuit Breaker क्या है
ऐसा ऑटोमेटिक रूप से संचालित शेयर बाजार का सिस्टम जिसे किसी भी शेयर या इंडेक्स को एक तरफ के असाधारण झुकाव की तेजी से होने वाले निवेशकों के नुकसान की रक्षा के लिए डिज़ाइन किया जाता है उसे Circuit Breaker कहते हैं।
सर्किट ब्रेकर क्यों लगाये जाते हैं
Share Market में सर्किट ब्रेकर अत्यधिक अस्थिरता के समय घबराहट में होने वाली बिकवाली को रोकने के लिए लगाया जाने वाला उपाय हैं। व्यक्तिगत प्रतिभूतियों में कीमतों के बड़े बदलाव पर भी रोक लगाने में ये सहायक होते हैं। यहां पढ़ें किस कंपनी का शेयर खरीदें हमारी साइट पर।
सर्किट ब्रेकर कैसे निर्धारित होता है
शेयर बाजार में Circuit Breaker प्रतिशत में पहले से निर्धारित वेल्यू है जो किसी भी शेयर या इंडेक्स में किसी भी दिशा में भारी बदलाव होने पर स्वचालित तरीके से ट्रिगर का काम करते हैं। कितनी कीमत बढ़ने या गिरने पर शेयर या सूचकांक पर सर्किट ब्रेकर लगेगा इसका निर्धारण उसके पिछले क्लोजिंग रेट से किया जाता है। आमतौर पर सर्किट ब्रेकर शेयरों और इंडेक्स दोनों के लिए निर्धारित होते हैं। Circuit Breaker के उल्लंघन के बाद संभवतः कई कदम उठाए जा सकते हैं।
सर्किट ब्रेकर लगने पर विकल्प
Circuit Breaker लगने पर स्टॉक एक्सचेंज एक निश्चित अवधि के लिए उस शेयर या सूचकांक में व्यापार को रोक सकते हैं। या फिर पूरे व्यापार दिवस के लिए उस शेयर या सूचकांक में व्यापार की रोक लगा सकते हैं। पहले विकल्प के मामले में, शेयर में व्यापार बाजार प्रतिभागियों के बीच व्यापार गतिविधि को ठंडा करने की अनुमति देने के लिए कुछ मिनटों या कुछ घंटों तक रोका जा सकता है। इस समय की अवधि में बाजार उस शेयर के बारे में अचानक आई किसी खबर को समझने और आत्मसात करने का मौका देते है। इसके बाद शेष व्यापार सत्र के दौरान उस शेयर के प्रति तर्कसंगत दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है। यदि कुछ देर के अंतराल के बाद भी शेयर की कीमतें अस्थिर रहतीं हैं और स्थिती फिर से नियंत्रण के बाहर जा रही है तो एक्सचेंज दूसरा विकल्प अपनाते हुए दिन के बाकी व्यापार के समय के लिये शेयर की ट्रेडिंग पर प्रतिबंध लगा सकते हैं।
Circuit Breaker की नियमित होती है समीक्षा
इन Circuit Breaker पर लगाये जाने वाले प्रतिशत स्तर नियमित रूप से संशोधित होते रहते हैं। शेयर के स्तर या सूचकांक के आधार पर अलग अलग समय पर इनमें बदलाव किये जाते हैं। उदाहरण के लिए, किसी स्टॉक में कुछ अवधि के लिए 20 प्रतिशत पर एक Circuit Breaker हो सकता है और बाद में यदि स्टॉक एक्सचेंज को लगे तो इसे नीचे 10% तक संशोधित किया जा सकता है।
सर्किट ब्रेकर के नुकसान
सर्किट ब्रेकर का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि यह सीमित अवधि के लिए ही सही ऊपर या नीचे दोनों तरफ स्टॉक को अपने वास्तविक मूल्य पर पहुंचने से रोकता है। दूसरे जो लोग अंदरुनी खबर रखते हैं वे समय पर शेयर की कीमत का लाभ उठा सकते हैं जबकी जब तक रिटेल इनवेस्टर तक वह समाचार पहुंचता है वे सर्किट ब्रेकर की वजह से उसका लाभ नहीं ले सकते।
भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर
भारतीय शेयर बाजारों में विभिन्न शेयरों के लिए Circuit Breaker निर्धारित हैं। इनमें से सामान्य सर्किट ब्रेकर 2 प्रतिशत, 5 प्रतिशत, 10 प्रतिशत या 20 प्रतिशत पर लगते हैं। डेरिवेटिव सेगमेंट में कारोबार किए जाने वाले स्टॉक में सर्किट ब्रेकर नहीं होते हैं।
Circuit Breaker on Indexes
भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर, सूचकांक आधारित बाजार-व्यापी सर्किट ब्रेकर सिस्टम किसी भी तरफ इंडेक्स की चाल पर तीन चरणों में लागू होता है 10 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 20 प्रतिशत पर। सूचकांक पर Circuit Breakers जब ट्रिगर होते हैं तो देश भर में सभी इक्विटी बाजारों में एक साथ व्यापार को रोक देते हैं। बाजार-व्यापी सर्किट ब्रेकर बीएसई सेंसेक्स या निफ्टी 50 की चाल से ट्रिगर होते हैं, चाहे इन दोनों में से जो भी पहले ट्रिगर को हिट कर दे। हाल ही में कोरोना वायरस के संकट के समय मार्च 2020 में जब शेयर बाजार तेजी से गिर रहे थे उस समय कई बार भारतीय बाजारों में सर्किट ब्रेकर के कारण कारोबार रोकना पड़ा।
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