Global Recession वैश्विक मंदी क्या है और इसको कैसे पहचानते है? Global Recession वैश्विक मंदी की जानकारी, इसके लक्षण और इसकी परिभाषा आसान हिंदी में समझने की कोशिश करते हैं। यदि आप निवेशक हैं तो वैश्विक मंदी के समय आप को क्या करना चाहिए यह भी जानेंगे।
What Is a Global Recession? वैश्विक मंदी क्या है?
ऐसी मंदी जो दुनिया भर के कई देशों को प्रभावित करती है और जिसमें आर्थिक उत्पादन में गिरावट आती है उसे वैश्विक आर्थिक मंदी या Global Recession कहते हैं। वैश्विक मंदी में एक लंबे समय तक दुनिया भर में आर्थिक गिरावट देखी जाती है।
IMF के अनुसार Global Recession तब मानी जाती है जब विश्व की प्रति व्यक्ति GDP में गिरावट आए और साथ-साथ औद्योगिक उत्पादन, व्यापार, निवेश, रोजगार आदि आर्थिक संकेतकों में भी गिरावट दिखाई दे।
Global Recession यानी वैश्विक मंदी वह स्थिति होती है जब दुनिया के कई बड़े देशों की अर्थव्यवस्था एक साथ धीमी पड़ जाती है, उत्पादन घटता है, व्यापार कम होता है, बेरोजगारी बढ़ती है और आर्थिक गतिविधियाँ गिरने लगती हैं।
Global Recession की परिभाषा
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के द्वारा दी गई परिभाषा के अनुसार यदि प्रति व्यक्ति वास्तविक विश्व जीडीपी (क्रय शक्ति समता भारित) में गिरावट को कहते हैं जिसके साथ ही यदी सात अन्य वैश्विक वृहद आर्थिक संकेतकों औद्योगिक उत्पादन, व्यापार , पूंजी प्रवाह, तेल की खपत, बेरोजगारी दर, प्रति व्यक्ति निवेश और प्रति व्यक्ति खपत में से किसी एक या अधिक में भी गिरावट दिखाई दे तो उसे Global Recession कहते हैं। क्रय शक्ति समता यानी Purchasing power parity में अलग अलग देशों में वस्तुओं की क्रय शक्ति के अनुसार गणना की जाती है।
आमतौर पर किसी देश में मंदी तब मानी जाती है जब लगातार दो तिमाही GDP गिरती है, लेकिन Global Recession के लिए पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था का धीमा होना जरूरी होता है।
वैश्विक मंदी को समझना
IMF यानी अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की उपर दी गई परिभाषा के अनुसार जीडीपी में गिरावट के साथ साथ यदी अन्य आर्थिक संकेतक जैसे कि औद्योगिक उत्पादन, व्यापार , पूंजी प्रवाह, तेल की खपत, बेरोजगारी दर, प्रति व्यक्ति निवेश और प्रति व्यक्ति खपत भी मंदी का संकेत दें तो वैश्विक मंदी मानी जा सकती है। हालांकि IMF ने इसके लिए कोई अवधि निर्धारित नहीं की है पर लगातार दो तीन तिमाही तक चलने वाली मंदी को ही वास्तविक मंदी माना जा सकता है। 1970 के बाद 1975, 1982, 1991, 2009 और 2020 में आईं मंदी को वैश्विक मंदी माना जाता है।
Global Recession के मुख्य कारण
वैश्विक मंदी कई कारणों से आ सकती है:
- ब्याज दरें बहुत बढ़ना
- तेल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी
- बैंकिंग या फाइनेंशियल संकट
- युद्ध या geopolitical tension
- व्यापार युद्ध (Trade War)
- महामारी (जैसे Covid-19)
- शेयर बाजार crash
उदाहरण: 2020 में कोरोना महामारी के कारण पूरी दुनिया में आर्थिक गतिविधियाँ रुक गई थीं और वैश्विक मंदी आई थी।
कोरोना वायरस काल में मंदी
2020 में कोरोना वायरस के कारण विश्व भर के देशों में हुए लॉकडाउन के कारण गंभीर वैश्विक मंदी का दौर शुरू हुआ था। ना सिर्फ़ जी 7 देश अपितु कोरोना वायरस और लॉकडाउन के कारण कई विकासशील देश भी कोरोना वायरस मंदी की चपेट में आ गए थे। लॉकडाउन में आर्थिक गतिविधियाँ धीमी पड़ गईं, तेल की माँग बहुत तेज़ी से गिर गई जिसके कारण क्रूड की क़ीमतें धड़ाम से नीचे गिरने लगीं। बेरोज़गारी बढ़ गई थी और वस्तुओं की माँग में बेतहाशा कमी आई थी।
मंदी का असर
मंदी लोगों के पैसा खर्च करने के तरीकों पर भी असर डालती है और इससे स्पष्ट रूप से कई प्रकार के व्यवसाय प्रभावित होते हैं। विशेष रूप से खुदरा स्टोर, रेस्तरां और होटल, जिम, मनोरंजन स्थल, थियेटर, सौंदर्य सैलून और स्पा आदि व्यवसाय बहुत दबाव में आ जाते हैं। ट्रेवेल और परिवहन पर भी इसका बुरा असर होता है। होटल, पर्यटन और एयरलाइंस उद्योग पर भी इसकी मार पड़ती है।
Global Recession के लक्षण
जब ये चीजें दिखने लगें तो समझिए दुनिया मंदी की तरफ जा रही है:
- GDP Growth कम होना
- बेरोजगारी बढ़ना
- शेयर बाजार गिरना
- व्यापार कम होना
- कंपनियों का profit कम होना
- बैंक लोन कम देना
- Real Estate गिरना
Global Recession का शेयर बाजार पर असर
Global Recession का शेयर बाजार पर बहुत बड़ा असर होता है:
| Sector | Impact |
|---|---|
| Banking | Negative |
| IT | Mixed |
| Metal | Negative |
| Real Estate | Negative |
| FMCG | Less impact |
| Pharma | Positive |
| Gold | Positive |
मंदी के समय आमतौर पर:
- Stock market गिरता है
- Gold बढ़ता है
- Interest rate बाद में कम होते हैं
- Economy recover होने में समय लगता है
मंदी से बाहर आना
खुशी की बात है कि कोई भी वैश्विक मंदी हमेशा नहीं रहती। यह एक आर्थिक चक्र है जो चलता रहता है। मंदी के बाद तेज़ी आती है। ऐसे व्यवसाय जो नई परिस्थितियों में अपने को ढाल लेते हैं और नई माँग पैदा करने में सक्षम रहते हैं वही मंदी में भी अपने व्यवसाय को क़ायम रखने में सफल रहते हैं।
Global Recession में निवेश कैसे करें?
Global Recession के समय:
- SIP बंद नहीं करनी चाहिए
- Gold में थोड़ा investment
- Large Cap stocks खरीदना
- Debt funds / FD रखना
- Cash reserve रखना
- Long term investing करना
Best sectors in recession:
- FMCG
- Pharma
- Utilities
- Gold
- Large Cap stocks
संक्षेप में
Global Recession वह स्थिति होती है जब दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था एक साथ धीमी पड़ जाती है। इसमें GDP growth कम हो जाती है, बेरोजगारी बढ़ती है और शेयर बाजार गिरते हैं। मंदी में निवेश करने की रणनिति पर चलना चाहिए और Global Recession में निवेशकों को panic नहीं करना चाहिए बल्कि अच्छे Large Cap stocks और SIP में निवेश जारी रखना चाहिए क्योंकि मंदी के बाद सबसे ज्यादा तेजी आती है।
