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बोनस शेयर और राइट शेयर में अंतर

बोनस शेयर और राइट शेयर में अंतर क्या होता है, यह कैसे जारी किये जाते हैं और इनकी कितनी लागत हो सकती है। बोनस शेयर और राइट शेयर जारी क्यों किये जाते हैं, इनका अर्थ औऱ मुख्य अंतर कौन से हैं यह सब समझते हैं आसान हिंदी में। किसी भी कंपनी की पूंजी निश्चित कीमत के छोटे शेयरों में विभाजित होती है। जिसमें प्रत्येक शेयर को स्वामित्व की इकाई के रूप में माना जाता है जिसे बाजार से धन जुटाने के लिए आम जनता को बिक्री के लिए पेश किया जाता है। शेयर बाजार के अन्य सभी पहलुओं को समझने के लिये पढ़ें शेयर मार्केट इन हिंदी हमारी साइट पर। Bonus Shares and Right Shares in Hindi.



बोनस शेयर और राइट शेयर में अंतर

बोनस शेयर और राइट शेयर में अंतर

Bonus Shares and Right Shares in Hindi. कंपनी अधिनियम के अनुसार मौजूदा शेयरधारकों को राइट शेयरों के रूप में शेयर जारी करके कंपनियों की सब्स्क्राइब की गई पूंजी बढ़ाई जा सकती है। इसके विपरीत, जब एक कंपनी के पास बड़ी मात्रा में लाभ से एकत्र किया गया रिजर्व होता है तो कंपनी इस तरह के मुनाफे को पूंजी में बदल देती है और शेयरधारकों के बीच उनकी होल्डिंग्स के अनुपात में विभाजित कर देती है। इन्हें बोनस शेयर के रूप में जाना जाता है और इसके लिए शेयर होल्डर को कुछ भी भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होती है। इस लेख में अपको बोनस शेयर और राइट शेयर में अंतर को बताया जायेगा।


राइट शेयर

राइट शेयर कंपनी द्वारा जारी किए गए वो शेयर हैं जिन्हें कंपनी की सब्स्क्राइब की गई शेयर पूंजी को बढ़ाने के उद्देश्य से वर्तमान शेयरहोल्डरों को जारी किया जाता है। राइट शेयर मुख्य रूप से मौजूदा इक्विटी शेयरधारकों को प्रो-रेटा आधार पर जारी किए जाते हैं। कंपनी प्रत्येक शेयरधारक को ऑफर लेटर भेजती है जो कंपनी द्वारा रियायती कीमतों पर उसे ऑफर किये गए शेयर खरीदने का विकल्प देती है। विस्तार से राइट शेयर के बारे में पढ़ें हमारी साइट पर।

बोनस शेयर

बोनस शेयर पहले से मौजूद शेयरों की संख्या के आधार पर मौजूदा शेयरधारकों को जारी मुफ़्त शेयरों को कहते हैं। बोनस इश्यू केवल जारी किए गए शेयरों की कुल संख्या बढ़ाता है, लेकिन यह कंपनी की नेट वर्थ में कोई बदलाव नहीं करता है। बोनस शेयर कंपनी में ताजा पूंजी नहीं जोड़ते हैं क्योंकि उन्हें शेयरधारकों को बिना किसी कीमत के जारी किया जाता है। एक तरह से यह शेयरधारकों को कंपनी के लाभ का हिस्सा नये शेयरों के रूप में बांटने के तरीका है। विस्तार से बोनस शेयर के बारे में पढ़ें हमारी साइट पर।

अंतर

इस अंतर को निम्न बिंदुओं से समझा जा सकता है:

प्रक्रिया

बोनस शेयर शेयरधारकों को कंपनी के रिजर्व में से फ्री में दिये गये शेयर हैं। यह रिजर्व कंपनी की आय में से एकत्र किया गया होता है। दूसरी तरफ राइट शेयर बाजार से अतिरिक्त पूंजी जुटाने के लिए कंपनी द्वारा मौजूदा शेयरधारकों को दिए गए शेयर हैं।

कीमत

राइट शेयर मौजूदा शेयरधारकों को बाजार मूल्य से कम कीमत पर पेश किए जाते हैं।शेयर की फेस वैल्यू पर आमतौर पर शेयर प्रीमियम जुड़ा रहता है। इसके विपरीत बोनस शेयर शेयरधारकों को मुफ्त में जारी किए जाते हैं।

उद्देश्य

राइट इश्यू का मूल उद्देश्य कंपनी के लिये अतिरिक्त पूंजी जुटाना है। इसके विपरीत बोनस इश्यू का उद्देश्य बकाया शेयरों की संख्या में वृद्धि करके इसके सक्रिय व्यापार में वृद्धि करना है। यानी यह कंपनी के शेयरों की लिक्विडिटी को बढ़ाता है।


Bonus Shares and Right Shares in Hindi

चाहे बोनस शेयर हों या राइट शेयर, इन्हें जारी करने के बाद कंपनी इन्हें स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट करती है जिससे इनमें खरीद बिक्री हो सके। सबसे बड़ा बोनस शेयर और राइट शेयर में अंतर यही है कि राइट शेयर द्वारा कंपनी मौजूदा शेयरहोल्डरों को नये शेयर जारी करके अतिरिक्त पूंजी जुटाती है जबकि बोनस शेयर डिविडेंड की तरह कंपनी की आय शेयरहोल्डरों में बांटने का एक तरीका है।

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